बारिश के मौसम में तुम्हारी यादें एक एहशास बन के आती है,बारिशें तो आज भी होती है पर वो बुँदे अब नही गिरा करती है।
इन बारिशों के मौसम में तुम और याद आते हो, तुम्हारे चेहरे की मुस्कान वो रिमझिम फुहारों सी तुम्हारी पेशानी घनघोर घटाओं सी तुम मेरा हाथ थामकर फिर से ले आये थे उन्ही बादलों के घेरे में, जहां बारिश की बूँदें पड़ती रही थी दोनों पर और तुम मुझे देखते रहे और मुस्कुराते रहे।
मैं तुम्हारा हाथ थामे जाने किस दुनिया की सैर कर रहा था भूल गए थे उस शाम हम हर एक रस्म को हर एक बंधन को !
आज फिर बादल है, बारिश की बूँदें हैं और दूर तलक तुम्हारी यादें हैं !
आगे जारी है..............!
-श्याम जोशी !बारिशबूँदें यादें
(सर्वाधिकार सुरक्षित )
इन बारिशों के मौसम में तुम और याद आते हो, तुम्हारे चेहरे की मुस्कान वो रिमझिम फुहारों सी तुम्हारी पेशानी घनघोर घटाओं सी तुम मेरा हाथ थामकर फिर से ले आये थे उन्ही बादलों के घेरे में, जहां बारिश की बूँदें पड़ती रही थी दोनों पर और तुम मुझे देखते रहे और मुस्कुराते रहे।
मैं तुम्हारा हाथ थामे जाने किस दुनिया की सैर कर रहा था भूल गए थे उस शाम हम हर एक रस्म को हर एक बंधन को !
आज फिर बादल है, बारिश की बूँदें हैं और दूर तलक तुम्हारी यादें हैं !
आगे जारी है..............!
-श्याम जोशी !बारिशबूँदें यादें
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